3/20/10

स्टोनहेंज !

७ मार्च ,२०१०
स्टोनहेंज , इंगलैंड


कहते है की अगर किसी चीज को दिलो-जान से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में लग जाती है।
अब दुनिया के १०० आश्चर्यो से इश्क सा हो गया है । और सिर्फ मै ही जिद्द कर उनसे मिलने नहीं जाता, वो भी अब मुझे बुलातीं है ।

1/18/10

वार्षिक रिपोर्ट - २००९

प्यारे पाठको ,

आशा है की 'आल इज्ज वेल ' होगा आपके साथ भी ।
दो दिन पहले की बात है मेरे एक पाठक ने मुझसे 'एक घुमक्कड़' चिठ्ठा का वार्षिक रिपोर्ट माँगा । उनका भी लोजिक सही था , बोले की घुमक्कड़ भाई बातें और प्लान तो बड़े बड़े बनाते हो , चलो ये तो बताओ की पिछले साल किया तुमने क्या ??
मैंने बोला की सरकार आप तो हमेशा मेरा ब्लॉग पढ़ते है, ये रहे मेरी पिछले साल के घुमक्कड़ी से रिलेटेड कुछ सवाल , चलिए आप ही गेस मारिये . और पाठको आप क्यों पीछे है ? चलिए आप भी गेस मारिये .
२१ जनवरी को सही जवाब कमेन्ट में पोस्ट कर दिया जाएगा ।










और हां , फ़ोनों फ्रेंड करना हो तो - +९१ ९ ० ० ७ ० ० ० ६ ७ ० डायल कीजिये !

1/2/10

37th आश्चर्य !

मै नहीं मानता की हिलमैन के १०० आश्चर्य ही वास्तविक १०० आश्चर्य है इस दुनिया के । ये तो घुमक्कड़ी की मार्केटिंग है । कई आश्चर्यो को अब तक किताबो में जगह नहीं मिल पायी है और कारण आपको - हमको सबको पता है ।

बिहार के गया जिले के निवासी, दसरथ मांझी ने अकेले ही गहलौर के पहाड़ी को काट कर ३६० फिट लम्बा , २५ फिट उचा और ३० फिट चौड़ा सड़क बना डाला था । ये काम करने में उन्हें २२ साल लगे। २२ साल तक एक हथौड़ा और एक छेनी ले कर के जनाब डटे रहे । क्या ये अपने आप में एक आश्चर्य से कम है ??

खैर , हिलमैन जी के अनुसार दुनिया का 37th आश्चर्य है - हांगकांग का स्काईलाइन । दुनिया के अच्छे स्काईलाइनों में हांगकांग का स्काईलाइन सबसे अच्छा माना जाता है । घुमक्कड़ को हांगकांग के स्काईलाइन के दर्शन का सौभाग्य १२ दिसंबर'०९ को मिला । इसके साथ ही इनके १६ आश्चर्यो के दर्शन पुरे हुए। ये जनाब १०० में से १०० देख कर ही मानेंगे !

12/31/09

ढाका डायरी

प्यारे पाठको ,
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये !

पिछले कुछ चंद सफ़र के बारे में ये घुमक्कड़ आपको अपडेट नहीं कर पाया , माफ़ कीजियेगा - दौड़ लगाना पड़ गया था

कलकत्ता छोड़े हुए महीने हो चुके है वहा की ट्राम , काठी रोल और आबो हवा की अब बहुत याद आती है . साल में कलकत्ता से बहुत अटैचमेंट हो गया वहा थे तो गलियाते थे - वहा की धीमी ज़िन्दगी , उमस भरी गर्मी और लोकल तौर तरीके को; अब जी करता है एक बार और जाए , गले लगा ले शहर को और पूछे - 'कोलकाता, की होछ्छे ? की खोबोर ? '

नवम्बर के पहले हफ्ते में बिजनेस के सिलसिले में ढाका जाने का मौका मिला कोलकाता से ढाका एक झपकी मारते ही आप पहुच जायेंगे साल्ट लेक से एअरपोर्ट जाने में जितना टाइम लगा , उससे भी कम टाइम में कोलकाता से ढाका पहुच गए।

ढाका एअरपोर्ट से बाहर निकलते ही ऐसा लगा जैसे पूरा ढाका खड़ा हो लोगो के भीड़ को चीरते हुए धीरे धीरे मेरी गाडी आगे बढ़ी और मैंने शुरु किया खिड़की से बाहर झाकना

ढाका में तक़रीबन साढ़े चार लाख रिक्सा रोज चलते है 'रिक्सा कैपिटल ऑफ़ वर्ल्ड ' के नाम से भी जाना जाता है ये शहर यहाँ की सबसे बड़ी समस्या यहाँ की ट्राफिक है ट्राफिक में घंटो फसे रहना आम बात है - घंटे अगर आप लेट से दफ्तर पहुचते है तो ये कोई नयी बात नहीं होगी। दिन के बिजनेस ट्रिप में ट्राफिक का प्रकोप हमारे ऊपर खूब बरसा एक बार बजे पिज्जा का आर्डर किया जो की :४५ में मिला पिज्जा हट और डोमिनोस के प्रोमिसेस यहाँ नहीं चलते ज़िन्दगी धीमी है और यहाँ के युवा देश से बाहर निकलना चाहते है। बंगलादेशी बदनाम है इल्लेगल इम्मिग्रेसन के लिए इस कलंक के कारण यहाँ के युवाओ को दुसरे देश का वीसा मिलने में भी काफी तकलीफ होती है

एक अमेरिकी के लिए ज़िन्दगी कितना आसान है और एक अफगानी , इराकी या बंगलादेशी के लिए कितना मुश्किल ? सरहदे गिरा देना और सभी को सामान अधिकार देना क्या एक उम्मीद नहीं ? कब जा कर हम कह सकेंगे की हम इस ग्रह में रहते है , इन देशो में नहीं ?

10/20/09

किन्डर स्तात्त इंदर (जर्मन )

करीब दस वर्ष पहले की बात है, जर्मन सरकार को एहसास हुआ की देश की प्रगति के लिए उन्हें बड़ी संख्या में साफ्टवेयर इंजीनियर की जरुरत होगी. यूरोप और अमरीका में अब साफ्टवेयर इंजीनियर और हिन्दुस्तानी लगभग एक दुसरे के पर्याय बन गए है. सबसे पहले तो जर्मन सरकार ने सोचा की हिन्दुस्तानियों को यहाँ लाना होगा।

दूसरा रास्ता : साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई में निवेश कर उच्च स्तरीय साफ्टवेयर इंजिनियर जर्मनी में ही तैयार किया जाए.असली समस्या बड़ी संख्या में साफ्टवेयर इंजिनियर तैयार करना था( 'बड़ी संख्या' पे ध्यान दीजियेगा)। अब देश में ज्यादा बच्चे होंगे तभी तो ज्यादा से ज्यादा बच्चे साफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करेंगे
अंत में पुरी समस्या को एक स्लोगन से रेप्रेसेन्ट किया गया : किन्डर स्तात्त इंदर ( बच्चे, नाकि भारतीय )

आपको क्या लगता है , आने वाले कल में भारतीय और चीनी लोगो की क्या भूमिका रहेगी पूरे विश्व में इंजीनियरों और एम-बी-ए के बढ़ते डिमांड के मद्देनज़र ? क्या विदेशी, भारतीय और चीनी मूल के 'स्किल्ड लेबर ' को अपनाएंगे?

10/2/09

तोर्तिल्ला स्पैन्योला

आज का गेस्ट पोस्ट इरीस और मेलोंग द्बारा जो आपको सिखायेंगे 'तोर्तिल्ला स्पैन्योला ' अथवा 'स्पेनिश आमलेट' बनाना !


१। आलू और प्याज काट कर धो ले




२। टमाटर काट कर उसके साथ ओलिव आयल और पनीर मिला ले



३। धीमी आंच पर देर तक तलते रहिये


४। अंडे को अच्छे तरह फेट कर तले हुए आलू के साथ मिलाईये



५। कुछ इस तरह ...



६। फ़िर आमलेट बना लीजिये । याद रहे : हल्का तेल, धीमी आंच और देर तक ।



और ये है तैयार ...तोर्तिल्ला स्पैन्योला!!
मुंह में पानी आया ? ;)